कहा जाता है कि कोई व्यक्ति ऊंचे पद पर होने के बाद भी अगर अपने जीवन में आये लोगों को नहीं भूलता है तो यह उस व्यक्ति का सबसे बड़ा गुण है। इसे साबित किया है हाल ही में भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बने भूपेंद्र सिंह सौन ने।
अपने विद्यालय न्यू बीयरशिबा पहुंचे लेफ्टिनेंट भूपेंद्र सिंह सौन ने विद्यालय की आया को प्रणाम कर शिक्षाकाल में उनके सेवाओं के लिए आभार जताया।
लेफ्टिनेंट भूपेंद्र का विद्यालय के बच्चों ने छलिया नृत्य की आकर्षक झांकी के साथ स्वागत किया। गाजे बाजे के साथ विद्यालय पहुंचने पर विद्यार्थियों ने उन पर पुष्पा वर्षा की। शिक्षिकायें तिलक लगाकर उन्हें परिसर में ले गई।
विद्यालय की आया हीरा धामी को देखकर भूपेंद्र प्रणाम कर उनका आभार जताया और साड़ी भेंट की।
विद्यालय के एक वाकये को याद करते हुए उन्होंने कहा कि एक बार आया हीरा धामी से उन्होंने किसी प्रकार की मदद के लिए पूछा था तब उन्होंने कहा था कि जिस दिन आफिसर बनोगे उस दिन उन्हें साड़ी देना। उनकी बात उन्हें आज तक याद है।विद्यालय की प्रधानाचार्य मीनाक्षी बिष्ट ने उन्हें स्मृति चिंह और शाल भेंट करते हुए कहा कि भूपेंद्र ने अपनी प्रतिभा से विद्यालय को जिले को गौरवान्वित किया है।
शिक्षिका हेमा भंडारी ने लोक परंपराओं के प्रतीक ऐंपण से बनी सुंदर कलाकृति उन्हें भेंट की।
लेफ्टिनेंट भूपेंद्र ने विद्यालय के प्रबंधक एडवोकेट भुवन भाकुनी, प्रधानाचार्य, शिक्षिकाओं का आभार जताते हुए कहा कि विद्यालय से मिली शिक्षा और सीख की बदौलत आज वह इस मुकाम पर पहुंच सके हैं।





