यूपी चुनाव से पहले सपा का बड़ा दांव, BJP के ‘पन्ना प्रमुख’ की काट के लिए शुरू की जातीय जनगणना

सत्ता में वापसी के लिए छटपटा रही समाजवादी पार्टी के ओहदेदार आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बूथ स्तर पर पसीना बहा रहे हैं। सरकार जिस तरह से जनगणना करा रही है, उसी तर्ज पर सपा वोटों की जातीय गणना करा रही है। हर विधानसभा में 25-25 पदाधिकारियों को लगाया गया है, जिनमें टिकट के दावेदार भी शामिल हैं।

आम तौर पर बूथ पर जातीय वोटरों की गणना अंदाज से होती है, लेकिन समाजवादी पार्टी की गणना से एक-एक वोट का जातीय रिकाॅर्ड निकल कर आ जाएगा। जिला स्तर से इसकी जोनवार समीक्षा की जा रही है। गणना पूरी हो जाने के बाद क्रास चेकिंग कराई जाएगी, इसके बाद फाइनल सूची तैयार होगी।जिले की नौ विधानसभा सीटों में से सात सीटें भाजपा के पास हैं, जबकि सपा महज दो सीटों पर काबिज है। यादव-मुस्लिम गठजोड़ से पिछले दो चुनाव में सपा सत्ता की सीढ़ी नहीं चढ़ पा रही है, इसलिए अब पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के फार्मूले को लेकर आगे बढ़ रही है। दो महीना पहले पार्टी हाईकमान ने विधानसभा क्षेत्रों में प्रमुख जातियों के मतदाताओं की स्थिति के साथ जातीय नेताओं का डाटा मांगा था।HINDI NEWS

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यूपी चुनाव से पहले सपा का बड़ा दांव, BJP के ‘पन्ना प्रमुख’ की काट के लिए शुरू की जातीय जनगणना

BY KAMLESH KUMAR SHARMAEDITED BY: ANSHUL BHARTARIYA

UPDATED: MON, 29 JUN 2026 05:21 PM (IST)

समाजवादी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बूथ स्तर पर जातीय जनगणना करा रही है, जिसमें हर विधानसभा में 25-25 पदाधिकारी लगाए गए हैं। यह कवायद भाजपा के …और पढ़ें

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समाजवादी पार्टी
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HIGHLIGHTS

  1. हर विधानसभा क्षेत्र में लगाए गए 25-25 ओहदेदार और टिकट के दावेदार
  2. जोन स्तर पर की जा रही समीक्षा, क्रास चेकिंग कराकर बनेगी अंतिम सूची

कमलेश शर्मा, बरेली। सत्ता में वापसी के लिए छटपटा रही समाजवादी पार्टी के ओहदेदार आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बूथ स्तर पर पसीना बहा रहे हैं। सरकार जिस तरह से जनगणना करा रही है, उसी तर्ज पर सपा वोटों की जातीय गणना करा रही है। हर विधानसभा में 25-25 पदाधिकारियों को लगाया गया है, जिनमें टिकट के दावेदार भी शामिल हैं।

आम तौर पर बूथ पर जातीय वोटरों की गणना अंदाज से होती है, लेकिन समाजवादी पार्टी की गणना से एक-एक वोट का जातीय रिकाॅर्ड निकल कर आ जाएगा। जिला स्तर से इसकी जोनवार समीक्षा की जा रही है। गणना पूरी हो जाने के बाद क्रास चेकिंग कराई जाएगी, इसके बाद फाइनल सूची तैयार होगी।

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जिले की नौ विधानसभा सीटों में से सात सीटें भाजपा के पास हैं, जबकि सपा महज दो सीटों पर काबिज है। यादव-मुस्लिम गठजोड़ से पिछले दो चुनाव में सपा सत्ता की सीढ़ी नहीं चढ़ पा रही है, इसलिए अब पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के फार्मूले को लेकर आगे बढ़ रही है। दो महीना पहले पार्टी हाईकमान ने विधानसभा क्षेत्रों में प्रमुख जातियों के मतदाताओं की स्थिति के साथ जातीय नेताओं का डाटा मांगा था।

जिले से भी अनुमान के आधार पर जानकारी दी गई थी, लेकिन वह सटीक नहीं थी। जिलाध्यक्ष शुभलेश यादव ने बूथ स्तर तक एक-एक जातीय वोटों की जानकारी जुटाने के लिए विशेष अभियान शुरू कराया है। अभी उन्होंने नई जिला कमेटी घोषित नहीं की है, निवर्तमान पदाधिकारियों, टिकट के दावेदारों को बूथ स्तर का विवरण जुटाने के लिए क्षेत्र में उतार दिया है।

भारतीय जनता पार्टी जिस तरह चुनाव के दौरान पन्ना प्रमुख बनाती है, मतदाता सूची के एक-एक पन्ने की पदाधिकारियों को जिम्मेदारी दी जाती है, ठीक उसी तरह सपा मतदाता सूची पदाधिकारियों को उपलब्ध कराकर जातीय डाटा एकत्रित करा रही है।

जातीय गणना की सूची फाइनल करने की अंतिम तिथि 30 जून तय की गई है, फिर उन्हीं पदाधिकारियों को दूसरी विधानसभा क्षेत्रों में लगाकर क्रास चेकिंग शुरू कराई जाएगी। प्रक्रिया पूर्ण कराकर 31 जुलाई तक फाइनल डाटा तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसी को आधार बनाकर पार्टी जातीय समीकरण साधेगी। टिकट वितरण में भी यह सूची उपयाेगी साबित हो सकती है।

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