भौगोलिक दृष्टि से बेहद जटिल और संवेदनशील माने जाने वाले उत्तराखंड में वर्ष 2017 के बाद से बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में अभूतपूर्व कायाकल्प हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न और राज्य सरकार की डबल इंजन नीतियों के तहत उत्तराखंड आज देश के सबसे तेजी से विकसित होते कनेक्टेड राज्यों की सूची में शामिल हो चुका है। ऑल-वेदर रोड, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट और दिल्ली-देहरादून एलिवेटेड एक्सप्रेसवे जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स ने न सिर्फ उत्तराखंड की कनेक्टिविटी को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाया है, बल्कि पहाड़ों से पलायन रोकने और पर्यटन आधारित आर्थिकी को मजबूत करने में गेमचेंजर साबित हुए हैं।
चारधाम ऑल-वेदर रोड: बारहमासी सुरक्षित सफर का सपना हुआ सच
उत्तराखंड की लाइफलाइन मानी जाने वाली ‘चारधाम ऑल-वेदर रोड परियोजना’ के तहत ₹12,000 करोड़ से अधिक की लागत से केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण किया गया है।जमीनी बदलाव: भूस्खलन संवेदनशील क्षेत्रों में आधुनिक टनल और सुरक्षित दीवारों का निर्माण किया गया है, जिससे अब मानसूनी सीजन में भी यात्रा बाधित नहीं होती और श्रद्धालुओं का सफर सुरक्षित हुआ है।
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट: पहाड़ के सीने को चीरकर दौड़ने वाली है ट्रेन
सैकड़ों सालों से पहाड़ के लोगों के लिए रेल देखना एक सपना था, जिसे इस महापरियोजना ने हकीकत में बदल दिया है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच कई किलोमीटर लंबी सुरंगों और ऊंचे पुलों का निर्माण अंतिम चरणों में है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से ऋषिकेश से कर्णप्रयाग का सफर घंटों से सिमटकर मिनटों का रह जाएगा, जिससे कुमाऊं और गढ़वाल दोनों अंचलों को सीधा लाभ मिलेगा।दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे: महज 2.5 घंटे में तय हो रही दूरी
दिल्ली से देहरादून के बीच बना नया एलिवेटेड एक्सप्रेसवे उत्तर भारत के सबसे आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की मिसाल है। एशिया के सबसे बड़े वाइल्डलाइफ कॉरिडोर (राजाजी नेशनल पार्क के ऊपर) के साथ बने इस एक्सप्रेसवे ने दिल्ली-एनसीआर से उत्तराखंड की दूरी को बेहद कम कर दिया है। इससे न केवल सप्ताहांत पर पर्यटन बढ़ा है, बल्कि राज्य में औद्योगिक निवेश की राह भी आसान हुई है।
देश का बेस्ट ‘हेली-इकोसिस्टम
दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों को आपातकालीन चिकित्सा और परिवहन से जोड़ने के लिए राज्य सरकार ने नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। केंद्र सरकार की ‘उड़ान’ योजना के तहत राज्य के दूरदराज के इलाकों में हेलीपैड और हेलीपोर्ट विकसित किए गए हैं। इसी का नतीजा है कि उत्तराखंड को देश में विमानन इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए सर्वश्रेष्ठ राज्य का पुरस्कार भी मिल चुका है।
सीमांत क्षेत्रों का विकास: ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’
चीन और नेपाल की सीमाओं से सटे उत्तराखंड के आखिरी गांवों (जिन्हें अब देश का पहला गांव कहा जाता है, जैसे माणा) के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए विशेष काम हुआ है। इन क्षेत्रों में सड़कों का जाल बिछाने के साथ-साथ बिजली, पानी और हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी पहुँचाई गई है, ताकि सामरिक सुरक्षा मजबूत हो और स्थानीय लोगों को रोजगार के लिए पलायन न करना पड़े।
विकसित उत्तराखंड की मजबूत नींव
इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में हुआ यह चौतरफा विकास केवल सड़कों और पुलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य की आर्थिकी की नई रीढ़ बन चुका है। जब पहाड़ों तक रफ्तार पहुंचती है, तो रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधाएं खुद-ब-खुद सुगम हो जाती हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर का यह नया जाल उत्तराखंड को देश के अग्रणी विकसित राज्यों की श्रेणी में खड़ा करने के लिए तैयार है।