बारिश के मौसम में पशुओं में बैक्टीरिया जनित खुरपका और मुंहपका बीमारी फैलने का खतरा बढ़ जाता है। जगह-जगह जमा गंदा पानी और सड़ी-गली घास के सेवन से गाय-भैंस समेत अन्य मवेशी इस बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। रोग फैलने की स्थिति में लगातार पशु संक्रमित होने लगते हैं, जिससे पशुपालकों को उपचार कराने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं, बीमारी के कारण पशुओं की मौत होने से आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।
पशुओं को इस गंभीर बीमारी से बचाने के लिए पशुपालन विभाग ने जिले में 2.09 लाख मवेशियों के टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए 22 जुलाई से विशेष टीकाकरण अभियान शुरू किया जाएगा, जो 8 सितंबर तक संचालित होगा।
अभियान को सफल बनाने के लिए पशुपालन विभाग की ओर से पशु चिकित्साधिकारियों के निर्देशन में 15 टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें निर्धारित लक्ष्य के अनुसार मवेशियों का टीकाकरण करेंगी।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एके सचान ने बताया कि टीकाकरण से पशुओं में खुरपका-मुंहपका बीमारी का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। उन्होंने बताया कि जिले में कुल 2 लाख 18 हजार 650 गोवंश और महिषवंशीय पशु हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि चार माह से कम उम्र के बछड़े-बछिया और सात माह की गर्भवती गाय-भैंस को टीका नहीं लगाया जाएगा। इसके अलावा शेष 2.09 लाख पशुओं को टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया है। पशुपालन विभाग ने पशुपालकों से भी अपील की है कि वे अपने मवेशियों का समय पर टीकाकरण जरूर कराएं और बारिश के मौसम में पशुओं की साफ-सफाई एवं खानपान का विशेष ध्यान रखें
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