कंपकंपाने वाली ठंड के बीच शहर में बनाए गए होटलनुमा आश्रय स्थल (रैन बसेरा) जरूरतमंदों के लिए राहत का साधन बनने के बजाय खाली पड़े हैं। पर्याप्त सुविधाएं और संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद जागरूकता की कमी के कारण गरीब और बेसहारा लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। ठंड से बचने की तलाश में जरूरतमंद लोग इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं और कई लोग रेलवे स्टेशन पर आवारा कुत्तों के बीच रात गुजार रहे हैं।
जहां एक ओर सर्द मौसम में लोग अपने घरों में रजाई और गद्दों में दुबके हुए हैं, वहीं दूसरी ओर शहर में ऐसे भी गरीब और असहाय लोग हैं, जिन्हें कड़ाके की ठंड में फुटपाथ, स्टेशन और खुले स्थानों पर चिथड़ों में लिपटकर रात काटनी पड़ रही है। यह स्थिति प्रशासनिक व्यवस्थाओं और जन-जागरूकता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
शहर के काली मेला रोड स्थित रैन बसेरा दिखावे में पूरी तरह होटल जैसी सुविधाओं से लैस है। यहां तीन महिला केयर टेकर और एक नाइट गार्ड की तैनाती की गई है। रैन बसेरे की कुल क्षमता 50 बिस्तरों की है, लेकिन दुर्भाग्यवश एक भी जरूरतमंद व्यक्ति यहां रात बिताने नहीं पहुंच रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि रैन बसेरे की जानकारी और वहां उपलब्ध सुविधाओं के बारे में सही तरीके से प्रचार-प्रसार किया जाए, तो ठंड के मौसम में फुटपाथ पर सोने को मजबूर गरीबों को राहत मिल सकती है। फिलहाल जागरूकता के अभाव में सरकारी व्यवस्था का लाभ जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पा रहा है।RainBasera
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