ईस्टर्न रेलवे के अधीन हावड़ा-दिल्ली मुख्य रेलखंड पर स्थित आरा जंक्शन के समीप बने ऐतिहासिक 40 वें रेलवे पुल का अब व्यापक आधुनिकीकरण किया जा रहा है।
ब्रिटिश शासनकाल में निर्मित इस पुल की संरचना को बदलकर आधुनिक तकनीक से सुदृढ़ बनाया जाएगा, जिससे ट्रेनों की गति बढ़ेगी।
इसके साथ-साथ परिचालन को और अधिक सुरक्षित एवं सुगम बनाया जा सकेगा। अब यह पुल दानापुर रेल मंडल के अंतर्गत आता है।
1885 में शुरू हुआ था निर्माण
मय के साथ रेलवे नेटवर्क का विस्तार हुआ और ट्रेनों की संख्या तथा गति दोनों में वृद्धि हुई, लेकिन पुरानी संरचना के कारण इस स्थान पर ट्रेनों की रफ्तार नियंत्रित रखनी पड़ती थी।
पुल पर लोहे के गर्डर होने के कारण जब ट्रेनें गुजरती थीं तो कंपन और तेज आवाज उत्पन्न होती थी। इसके चलते इस खंड पर ट्रेनों की गति सीमित रखनी पड़ती थी।
कई बार रखरखाव कार्य भी चुनौतीपूर्ण साबित होता था। आधुनिक रेल परिचालन की आवश्यकताओं को देखते हुए रेलवे ने इस पुल को नए स्वरूप में विकसित करने का निर्णय लिया है।
लोहे के गर्डर की जगह लगेगा कंक्रीट स्लैब
योजना के तहत पुराने लोहे के गर्डरों को हटाकर उनकी जगह कंक्रीट स्लैब आरसीसी संरचना स्थापित की जाएगी। इससे पुल की भार वहन क्षमता बढ़ेगी और ट्रेनों का आवागमन अधिक सहज हो सकेगा।
रेलवे का मानना है कि नई संरचना तैयार होने के बाद इस खंड पर ट्रेनों की गति बढ़ाने में मदद मिलेगी, जिससे हावड़ा-दिल्ली रेलमार्ग पर परिचालन दक्षता में सुधार होगा।
वर्तमान में पुल के आधुनिकीकरण का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। रेलवे द्वारा निर्धारित समयसीमा के अनुसार इस परियोजना को लगभग तीन महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।



