एमजीएम को ERMED की सदस्यता: अब मुफ्त में मिलेंगे विदेशों के मेडिकल जर्नल और रिसर्च पेपर

महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज अस्पताल को 11 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद ऐतिहासिक सफलता मिली है। 

दुनिया के प्रमुख मेडिकल डेटाबेस से जुड़े ‘राष्ट्रीय चिकित्सा पुस्तकालय-ईआरएमईडी’ (ERMED) समूह में एमजीएम को आधिकारिक सदस्यता मिल गई है।

इस प्रतिष्ठित क्लब में शामिल होने के साथ ही एमजीएम अब देश के उन चुनिंदा और गिने-चुने मेडिकल कॉलेजों की सूची में शुमार हो गया है, जिन्हें दुनिया भर की मेडिकल किताबों, अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रों और नवीनतम चिकित्सा जानकारियों तक मुफ्त पहुंच (फ्री एक्सेस) प्राप्त होगी।

वर्ष 2016 से चल रही थी कवायद 

एमजीएम प्रबंधन इस महत्वपूर्ण सदस्यता को हासिल करने के लिए वर्ष 2016 से ही लगातार प्रयासरत था। कई चरणों की जटिल तकनीकी प्रक्रियाओं, दस्तावेजी औपचारिकताओं और वर्षों तक चले पत्राचार के बाद आखिरकार संस्थान को यह बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। 

मेडिकल शिक्षा और अनुसंधान (रिसर्च) के क्षेत्र में इसे एमजीएम के इतिहास का एक बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। इस सदस्यता के अंतर्गत अब एमजीएम के छात्रों, डॉक्टरों, प्रोफेसरों और शोधार्थियों को दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित प्रकाशनों की हजारों ई-पुस्तकें (e-books), नामी मेडिकल जर्नल, क्लिनिकल गाइडलाइंस और उन्नत अध्ययन सामग्री बिना किसी शुल्क के उपलब्ध होगी। 

जिन अनमोल पुस्तकों और शोध पत्रों को पढ़ने के लिए अब तक भारी-भरकम सब्सक्रिप्शन फीस देनी पड़ती थी, वे अब संस्थान के अधिकृत उपयोगकर्ताओं को बिना किसी अतिरिक्त खर्च के उपलब्ध होंगे। 

विदेशों की नई खोजों और इलाज पद्धतियों से रहेंगे अपडेट  

विशेषज्ञों के मुताबिक, इन डिजिटल संसाधनों का बाजार मूल्य लाखों रुपये में है। अब तक नई और आधुनिक चिकित्सा जानकारियों के लिए एमजीएम के छात्रों और सीनियर डॉक्टरों को बेहद सीमित संसाधनों और किताबों पर निर्भर रहना पड़ता था। 

लेकिन इस डिजिटल लाइब्रेरी के जुड़ने से अब अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और यूरोप समेत दुनिया भर के विकसित देशों में प्रकाशित होने वाली नवीनतम चिकित्सा खोजों, नई जीवनरक्षक दवाओं, आधुनिक सर्जरी तकनीकों और सटीक उपचार पद्धतियों की लाइव जानकारी सीधे उपलब्ध होगी। 

इससे यहां के छात्र केवल पारंपरिक पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वैश्विक स्तर पर हो रही वैज्ञानिक प्रगति से कदम मिलाकर चल सकेंगे।

मरीजों के इलाज की गुणवत्ता में होगा बड़ा सुधार 

इस डिजिटल क्रांति का सबसे सीधा और बड़ा लाभ कोल्हान क्षेत्र से आने वाले मरीजों को मिलने की उम्मीद है। अब ओपीडी और इनडोर में तैनात डॉक्टरों को जटिल बीमारियों, दुर्लभ रोगों (Rare Diseases) और नई उपचार तकनीकों से संबंधित नवीनतम वैज्ञानिक डेटा तुरंत मिल सकेगा। 

इससे मरीजों के इलाज के दौरान डॉक्टरों को साक्ष्य-आधारित निर्णय (Evidence-based Decisions) लेने में अत्यधिक आसानी होगी। सीनियर सर्जन्स का मानना है कि आधुनिक चिकित्सा ज्ञान तक सीधी पहुंच होने से मरीजों के उपचार की गुणवत्ता विश्वस्तरीय होगी और गंभीर बीमारियों के प्रबंधन में व्यापक सुधार आएगा।

मेडिकल रिसर्च को मिलेगी नई उड़ान 

एमजीएम में शोध कार्यों (Research Work) को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बढ़ावा देने की दिशा में प्रबंधन लंबे समय से प्रयास कर रहा था। 

अब वैश्विक शोध सामग्री तक सीधी पहुंच मिलने से शोधार्थियों और सीनियर फैकल्टी को एक नई गति मिलेगी। वे दुनिया के टॉप मेडिकल जर्नल्स में प्रकाशित शोधों का गहन अध्ययन कर सकेंगे। 

इससे एमजीएम से प्रकाशित होने वाले शोध पत्रों की संख्या और गुणवत्ता दोनों में रिकॉर्ड वृद्धि होने की पूरी संभावना है, जिससे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संस्थान की ब्रांडिंग मजबूत होगी। 

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