जिले के स्वास्थ्य तंत्र पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एंबुलेंस उपलब्ध न होने के कारण एक फौजी के पिता की मौत के मामले पर उपमुख्यमंत्री द्वारा संज्ञान लिए जाने के बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के दावों पर सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच जिला महिला अस्पताल से सामने आई एक घटना ने मानवता और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
आरोप है कि बुधवार रात जिला महिला अस्पताल में प्रसव पीड़ा से परेशान एक महिला को समय पर चिकित्सकीय सहायता नहीं मिली और उसने अस्पताल की गैलरी में ही एक बच्ची को जन्म दे दिया। घटना के बाद अस्पताल में हंगामे की स्थिति बन गई।
शाम को अस्पताल आई थी गर्भवती महिला
जानकारी के अनुसार, ग्राम फैजपुर-निनाना निवासी दीपक कुमार अपनी पत्नी निकेता देवी को बुधवार शाम प्रसव पीड़ा होने पर जिला महिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे।
परिजनों के मुताबिक, शाम करीब साढ़े सात बजे महिला का परीक्षण किया गया। आरोप है कि जांच के बाद चिकित्सक ने उन्हें बताया कि अभी प्रसव में लगभग पांच दिन का समय है और फिलहाल अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं है। इसके बाद परिजन महिला को वापस घर ले गए।
देर रात बढ़ी प्रसव पीड़ा, दोबारा अस्पताल पहुंचे परिजन
परिजनों का कहना है कि रात के समय महिला की प्रसव पीड़ा अचानक बढ़ गई, जिसके बाद उसे दोबारा जिला महिला अस्पताल लाया गया। आरोप है कि इस दौरान समय पर चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध नहीं हो सकी और महिला अस्पताल की गैलरी में ही प्रसव के लिए मजबूर हो गई।
बताया जा रहा है कि महिला ने अस्पताल परिसर की गैलरी में एक बच्ची को जन्म दिया।
रिश्वत मांगने का आरोप
परिजनों ने आरोप लगाया है कि प्रसव कराने के एवज में अस्पताल की एक महिला कर्मी ने उनसे पांच हजार रुपये की मांग की थी। आरोप है कि रकम नहीं दिए जाने के कारण उन्हें समय पर आवश्यक सहायता नहीं मिली।
हालांकि, इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और इसकी जांच की जा रही है।
परिजनों का हंगामा, जांच के आदेश
घटना से नाराज परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। मामले की जानकारी मिलने के बाद अस्पताल प्रशासन सक्रिय हुआ।
अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) ने पूरे मामले की जांच शुरू कराने की बात कही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
जांच रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगी स्थिति
फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है। परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों और अस्पताल प्रशासन के पक्ष की जांच के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
स्वास्थ्य विभाग के सामने अब चुनौती यह है कि मरीजों को समय पर और संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के दावों को जमीनी स्तर पर भी प्रभावी बनाया जाए।#HospitalNegligence #HealthNews #WomenHealth #DistrictHospital #MedicalStaff #BreakingNews #Healthcare #UPNews #HospitalControversy #PatientCare





