पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा की एक गेस्ट टीचर के छह वर्षीय बेटे के केंद्रीय विद्यालय में प्रवेश से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को आवेदन पर नए सिरे से विचार करने और नियमानुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि हरियाणा गेस्ट टीचर्स सर्विस एक्ट, 2019 के तहत अतिथि शिक्षकों की सेवा शर्तें विधिवत विनियमित हैं। ऐसे में केवल इस आधार पर उन्हें नियमित सरकारी कर्मचारियों से अलग श्रेणी में नहीं रखा जा सकता कि वे गेस्ट टीचर के रूप में कार्यरत हैं।
न्यायालय ने यह भी माना कि गेस्ट टीचरों की सेवाएं राज्य की शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनके अधिकारों तथा सुविधाओं के संबंध में भेदभावपूर्ण दृष्टिकोण अपनाना उचित नहीं होगा।
यह आदेश न्यायमूर्ति Kuldeep Tiwari ने नूंह निवासी छह वर्षीय छात्र आशुतोष की ओर से दायर याचिका का निपटारा करते हुए पारित किया।
याचिका में केंद्रीय विद्यालय में प्रवेश प्रक्रिया के दौरान गेस्ट टीचर की संतान को मिलने वाली पात्रता और प्राथमिकता से जुड़े मुद्दों को उठाया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित कानूनी प्रावधानों और सेवा नियमों का परीक्षण किया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि हरियाणा गेस्ट टीचर्स सर्विस एक्ट, 2019 के तहत गेस्ट टीचरों की नियुक्ति और सेवा शर्तें निर्धारित हैं, इसलिए उन्हें केवल अस्थायी या अलग श्रेणी का कर्मचारी मानकर उनके बच्चों के हितों को प्रभावित नहीं किया जा सकता।
हाई कोर्ट के इस फैसले को गेस्ट टीचरों और उनके परिवारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस निर्णय का प्रभाव भविष्य में ऐसे अन्य मामलों पर भी पड़ सकता है, जहां अतिथि शिक्षकों के अधिकारों और सुविधाओं से जुड़े प्रश्न उठते रहे हैं।
अब संबंधित अधिकारियों को अदालत के निर्देशों के अनुसार आवेदन की दोबारा समीक्षा कर नियमों और परिस्थितियों के आधार पर नया निर्णय लेना होगा।PunjabAndHaryanaHighCourt #GuestTeacher #KendriyaVidyalaya #EducationNews #HaryanaNews #HighCourt #SchoolAdmission #LegalNews #GuestTeachers #KVAdmission #Nuh






