विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला शुरू होने में अब महज 35 दिन का समय शेष रह गया है। प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज हो चुकी हैं, वहीं स्थानीय व्यापारियों और छोटे दुकानदारों ने भी मेले को लेकर अपनी तैयारी शुरू कर दी है। हर वर्ष की तरह इस बार भी सुल्तानगंज और अजगैवीनाथ धाम की अर्थव्यवस्था को श्रावणी मेले से नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
दरअसल, अजगैवीनाथ धाम और इसके आसपास के क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों का बड़ा हिस्सा श्रावणी मेले पर निर्भर करता है। यह धार्मिक आयोजन केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के लिए रोजगार और आय का सबसे बड़ा अवसर भी है। स्थानीय लोगों के लिए यह मेला सालभर की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।
श्रावणी मेले के दौरान सुल्तानगंज शहर से लेकर कच्ची कांवरिया पथ तक 20 हजार से अधिक छोटी और बड़ी दुकानें सजती हैं। एक महीने तक चलने वाले इस आयोजन में करोड़ों रुपये का कारोबार होने का अनुमान रहता है। व्यापारियों, फेरीवालों और अस्थायी दुकानदारों के लिए यह समय सबसे अधिक कमाई वाला मौसम होता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मेले के दौरान होने वाली आय ही उनके परिवारों के सालभर के खर्च और जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाती है। यही वजह है कि श्रावणी मेले का इंतजार केवल श्रद्धालुओं को ही नहीं, बल्कि स्थानीय कारोबारियों और श्रमिकों को भी पूरे साल रहता है।
छोटी पूंजी से भी होती है अच्छी कमाई
श्रावणी मेले की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें बेहद कम निवेश के साथ भी रोजगार के अवसर उपलब्ध हो जाते हैं। सावन शुरू होते ही कांवरिया पथ पूरी तरह से सक्रिय हो जाता है और स्थानीय लोग अपने संसाधनों के अनुसार छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू कर देते हैं।
जिन लोगों के पास अधिक पूंजी नहीं होती, वे भी एक टेबल और कुर्सी के साथ कांवरिया पथ के किनारे बैठकर सेवाएं देना शुरू कर देते हैं। आयोडेक्स, रूई, लाल दवा और हैंडीप्लास्ट जैसी आवश्यक सामग्री के जरिए वे पैदल यात्रा कर रहे कांवरियों के पैरों में पड़े छालों और दर्द से राहत पहुंचाते हैं।
इस छोटे से व्यवसाय के जरिए कई लोग प्रतिदिन 500 से 1,000 रुपये तक की आमदनी कर लेते हैं। इसके अलावा मौसमी का जूस, शर्बत, चाय और नाश्ते की अस्थायी दुकानें लगाने वाले दुकानदार भी प्रतिदिन 1,000 से 2,000 रुपये तक का मुनाफा अर्जित कर लेते हैं।
धार्मिक आस्था के साथ रोजगार का भी बड़ा केंद्र
श्रावणी मेला धार्मिक दृष्टि से जितना महत्वपूर्ण है, आर्थिक दृष्टि से भी इसकी भूमिका उतनी ही बड़ी है। लाखों कांवरियों की आवाजाही स्थानीय व्यापार, परिवहन, खानपान और सेवा क्षेत्र को नई ऊर्जा प्रदान करती है। यही कारण है कि सुल्तानगंज और आसपास के क्षेत्रों के हजारों परिवारों के लिए यह मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवनयापन का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है।
अब जैसे-जैसे श्रावणी मेले की तिथि नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे प्रशासन, व्यापारी और स्थानीय लोग इस बड़े आयोजन के स्वागत के लिए तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं।ShravaniMela #Sultanaganj #KanwarYatra #AjgaivinathDham #Sawan2026 #BiharNews #ReligiousTourism #LocalEconomy #Kanwariya #Bhagalpur #Pilgrimage #India






